कुंडली में प्रथम भाव का कारकत्व सूर्य को प्रदान किया गया है | सूर्य को सिंह राशि का आधिपत्य प्राप्त है | सूर्य की दिशा पूर्व है | अर्थात यदि कोई वस्तु खो जाए और उस समय लग्न में सूर्य हो तो वह वस्तु पूर्व दिशा में मिलेगी | इसी प्रकार यदि जातक की कुंडली में सूर्य बलवान हो तो उस जातक का भाग्योदय पूर्व दिशा में होगा | यदि सूर्य पापाक्रांत हो तो उस जातक को पूर्व दिशा से राजनैतिक संघर्ष या विघ्न मिलेगा | पित्त प्रकृति होने के कारण जातक की अस्थियां दृढ होंगी | शास्त्रों के अनुसार यदि यदि जातक का जन्म दिन में हुआ हो तो यह पिता का कारक, यदि रात्रि का जन्म हो तो यह चाचा का कारक हो जाता है | बलवान सूर्य प्रधान व्यक्ति बुद्धिमान होगा | कमजोर सूर्य प्रधान व्यक्ति को पित्त से सम्बंधित रोग होने की सम्भावना होती है |