कुंडली में छठा भाव ऋण भाव कहलाता है | इस भाव से रोग, शत्रु, मुकदमे, विवाद और ऋण के विषय में जानकारी मिलती है | यह त्रिषडाय भाव भी कहलाता है | इस भाव का कारक ग्रह मंगल है | काल पुरुष की कुंडली में छठे भाव में कन्या राशि होती है जिसका स्वामी बुध है | छठे भाव में सूर्य होने पर जातक जिम्मेदार व्यक्ति होता है | चन्द्रमा होने पर जातक में सेवा भाव होता है | इस भाव में गुरु होने पर जातक को लिवर या ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है | शुक्र होने पर जातक का संतोषजनक स्वास्थ्य होता है | मंगल होने पर जातक अपने दुश्मनो को हराने की क्षमता होती है कभी कभी उच्च बुखार या दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं | बुध होने पर जातक का मन अक्सर बेचैन हो सकता है | शनि होने पर जातक कठिनाई का सामना करने में दृढ होगा | यह स्थान राहु के लिए सकारात्मक स्थान है जातक अपने शत्रुओ पर विजय प्राप्त करता है पर व्यवसाय में अक्सर उतार चढाव आते रहते हैं | केतु होने पर जीवन में बहुत सारे अवरोध आते रहते हैं | इस भाव से जातक के मामा के विषय में भी जानकारी मिलती है |