यदि लग्न या चन्द्रमा से प्रथम भाव में मंगल हो तो यह जातक के व्यक्तित्व का बोध करता है | ऐसा जातक अचानक ही क्रोधित हो सकता है पर जल्द ही शांत हो जाता है | प्रथम भाव का मंगल जातक के चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भाव को प्रभावित करेगा | अतः जातक को घर, वाहन आदि के सुख में समस्या दे सकता है | यह वैवाहिक जीवन और व्यवसाय में साझेदारी में विघटन की सम्भावना बनाता है | यह अचानक दुर्घटना की भी दे सकता है |
( नोट :- मांगलिक दोष से डरने और घबराने की आवश्यकता नहीं है | यह कई कारणों से रद्द भी होता है जिसकी जानकारी आगे के पोस्ट में दी जायेगी )
क्रमशः.......